Mela Par Nibandh

आज के निबंध का शीर्षक है – Mela Par Nibandh. इस निबंध में हमने मेले का महत्व , आयोजन का कारण और मेले में जाने का अनुभव के विषय में विस्तार से चर्चा की है | सभी Class के School Student के लिए निबंध अत्यंत उपयोगी होगा |

Essay on Fair in Hindi

भूमिका  :-  भारत रंगो और त्योहारों का देश है । यहां अधिकांश लोग गांव में रहते हैं जिनके पास मनोरंजन का अधिक साधन नहीं होता है । ऐसे में मेला उनके लिए अच्छा समय बिताने और मनोरंजन करने का एक बेहतरीन अवसर होता है । भारत के अधिकांश मेलों का आधार धार्मिक होता है जो स्थानीय भगवान, संत आदि में विश्वास के लिए मनाए जाते हैं । लेकिन कुछ मेलों का आधार आर्थिक भी होता है , जिनमें लोग पालतू जानवर या अनाज खरीदने और बेचने के लिए एकत्रित होते हैं ।

विषयविस्तार :- एक मेले की यात्रा बहुत ही रोचक और मनोरंजक होती है और इनमें बैसाखी मेला की तो बात ही कुछ और है । बैसाखी मेला भारतीय त्योहारों के पंचांग में एक अद्वितीय स्थान रखता है। यह हर साल बैसाख के महीने के पहले दिन आयोजित किया जाता है। यह गर्मियों के आगमन का प्रतीक है जो नई आशाओं और नई खुशियों से भरे हैं।

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Essay on Fair in Hindi

 मेला आमतौर पर गांव या कस्बे के बाहर आयोजित किया जाता है। इस साल मैं इसे अपने दोस्तों के साथ देखने गया था। हमने मेले में बड़ी भीड़ और चहलपहल  देखी।मेले को देखने के लिए युवा और बुजुर्ग, पुरुष महिलाएं और बच्चे नए – नविले कपड़ें पहन कर आएं थे ।   बिभिन्न प्रकार के  दुकानदार और विक्रेता ने अपने-अपने स्टाल और हाथगाड़ियाँ के साथ तैयार थें । मिठाई, फल और खिलौने दुकानों में भाँति-भाँति के उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे। बड़ी संख्या में फेरीवाले भी थे। कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, कुल्फी, और पानीपुरी  की काफी मांग थी। कई स्टालों पर,  पुरुष और महिलाएं  रंगीन बर्फी, रसगुल्ले और गुलाबजामुन  खा रहे थे वहीँ दूसरे ओर  कुछ लोग नमकीन व्यंजन जैसे समोसे और पकोड़े ले रहे थे।

कुछ स्टाल रंगीन खिलौने, गुब्बारे और गेंद बेच रहे थे; महिलाओं के लिए कांच की चूड़ियाँ, कंगन, हार और कृत्रिम आभूषणों की कई अन्य वस्तुओं की दुकानों पर भारी भीड़ थी। कुछ  महिलाओं ने देवी और देवताओं की मिट्टी की छवियों को खरीदना पसंद किया।  एक कोने में एक जादूगर  अपनी चाल दिखा रहा था। दूसरे कोने में एक सपेरा सांप का खेल  दिखा  रहा था |

हाथों में कटोरे लिए कुछ भिखारी भी दिख गए ।  झूलों और मीरा-गो-राउंड का आनंद लेने के लिए लोग लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े थें ।कुछ बच्चों के खो जाने की माइक घोषणाओं ने लोगों का ध्यान भटका दिया।  मैदान के बाहर, कबड्डी, रस्साकशी, और कुश्ती के   टूर्नामेंट आयोजित किए गए थें कुश्ती में आस-पास के गाँवों के नामी पहलवान भाग लेने के लिए यहाँ आये  थे। विजेता को एक हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। मेले की सबसे दिलचस्प घटना एक बैलों की दौड़ थी। विजेता को पीतल की ढाल और दो हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया । हर कोई ख़ुश और प्रफुल्लित लग रहा था  |

 शाम होते होते लोग खिलौनों और मिठाइयों से भरे हाथों के साथ अपने घरों की ओर जाते हुए दिखाई दिए | व्यापारी ख़ुशी-खशी  पैसों से भरा थैला लिए जा रहे थे । हर साल आयोजित होने वाला यह मेला यह ग्रामीणों के बीच सौहार्द और एकता लाने के लिए जाना जाता है |

उपसंहार : –   भारत देश में कई प्रकार के मेलों का आयोजन किया जाता है जैसे कि हस्तशिल्प मेला, पुस्तक मेला, पशु मेला, विज्ञान मेला इत्यादि । आजकल कई मेले सरकार द्वारा भी आयोजित किए जाते हैं जिनका मुख्य उद्देश्य होता है व्यापार और रोजगार में बढ़ोतरी । बच्चे, बूढ़े और नौजवान सबके लिए मेला एक अच्छा समय व्यतीत करने और मनोरंजन का बेहतरीन अवसर होता है । आर्थिक दृष्टि से भी मेलों का बहुत महत्व होता है क्योंकि यह रोजगार और आवश्यक वस्तुओं के आदान-प्रदान का बेहतरीन अवसर होता है ।

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