Essay on Pollution in Hindi

यह निबंध Paryavaran Pradushan की समस्या (Problem) और इसके रोकथाम (Solution) के उपायों  के बारे में विस्तार से बताता है |  यह essay on pollution in hindi  का निबंध  हमें Pradushan की समस्या को एक नए दृष्टिकोण से  हल करने के लिए प्रेरित करता है |  सभी school student class 5 से लेकर 12 तक के विद्यार्थी के लिए यह Nibandh बहुत उपयोगी है |

 

भूमिका  :-  विज्ञान के इस युग में इंसान को जहां कुछ वरदान मिले हैं वहां कुछ अभिशाप भी मिले हैं | प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप है जो विज्ञान की कोख में से जन्मा है और जिसे रहने सहने के लिए अधिकांश जनता मजबूर है | समाज का औद्योगिकीकरण, मोटर-चालित वाहनों की बहुत अधिक उपयोग , बढ़ती आबादी, अंधाधुन जंगलों के पेड़ काटना प्रदूषण की समस्या का मुख्य कारण हैं। प्रदूषण के लगातार बढ़ने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हुआ है जिसका प्रभाव हम बढ़ते हुए ग्लोबल वार्मिंग से देख सकते है। ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण में गैसों के बढ़ते असंतुलन सबसे बड़ा खतरा और चुनौती के रूप में जाना जाता है |

Essay on Pollution in Hindi

विषयविस्तार :-  प्रदूषण का मतलब  –  प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना ! न शुद्ध हवा, पानी और खाना मिलना और ना ही शांत वातावरण मिलना |

Paryavaran Pradushan
Paryavaran Pradushan par Nibandh

औद्योगिकरण की ने ही प्रदूषण ( Paryavaran Pradushan ) को हवा दी है | इसने संपूर्ण ब्रह्मांड को अपने शिकंजे में ले रखा है | सर्वप्रथम इसने  हवा को प्रदूषित किया है | प्रकृति ने वायु बिल्कुल विशुद्ध बनाई थी परंतु आजकल यातायात के साधनों में इतनी वृद्धि हुई है कि वह हर समय जहरीला धुआं छोड़ते हैं | कारखानों की चिमनओं और  मोटर-गाड़ियों ने वायु प्रदूषण को इतना बढ़ा दिया है कि श्वास लेना कठिन हो गया है | बड़े बड़े महानगरों में सायं काल के समय इतना वायु प्रदूषण होता है कि चारों और धुआं धुआं भर जाता है,  जिससे स्वास्थ प्रक्रिया के साथ आंखों भी प्रभावित होती है  | मुंबई की महिलाएं धोए हुए कपड़े जब छत से उतारने जाती है तो उन पर काले-काले कण जमे हुए पाती है | यह कण सांस के साथ आदमी के फेफड़ों में चले जाते हैं और कई बीमारियों को पैदा करते हैं | यह समस्या वहां ज्यादा होती है जहां सघन आबादी होती है और वृक्षों का अभाव होता है |

प्रदूषण के प्रकार  ( Types of pollution in Hindi ) :- 

जल प्रदूषण ( Water Pollution ) :- जल प्रकृति द्वारा दिया गया दूसरा उपहार है जो हमारे लिए बहुत उपयोगी है |  इसके बिना हम अधिक दिन नहीं जी सकते |जल का प्रमुख स्रोत नदी है शहरों व नगरों का गंदा जल द्वारा नदियों में पहुंचता है कारखानों का जल नदियों में डाला जाता है, जिससे नदियों का जल इतना दूषित बन चुका है कि बिना साफ किए पिया नहीं जा सकता है | हमारी नदियों में विशुद्ध जल बह रहा है धरती के नीचे विशुद्ध जल संग्रहित है प्रकृति के सभी जल स्रोत का मनुष्यों द्वारा इतनी पूरी तरह शोषण किया गया यह सब बर्बाद हो चुके है |

ध्वनि प्रदूषण ( Sound Pollution ) :- इंसान को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए | लेकिन आजकल कल-कारखानों, मोटर गाड़ियों, यातायात और लाउडस्पीकर की कानों को फाड़ने वाली ध्वनि ने  बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है | ध्वनि प्रदूषण से हमारे शरीर के कोमल तंतु प्रभावित होते हैं | कानों पर गलत गलत प्रभाव पड़ता है | सिर दर्द व भारीपन बना रहता है | इस प्रकार ध्वनि प्रदूषण से कई प्रत्यक्ष व परोक्ष रोग पैदा हो जाते हैं |

 

Impact of pollution on human life (  प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव )  :-  Paryavaran Pradushan के कारण इंसान के स्वस्थ जीवन को खतरा पैदा हो गया है | खुली हवा में लंबी सांस लेने को तरस गया है आदमी | गंदे जल के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती है जो इंसान के शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियां पैदा करती है | भोपाल गैस कारखाने से गैस के रिसाव के  कारण हजारों लोग मारे गए, कितने ही अपंग हो गए | पर्यावरण प्रदूषण के कारण न समय पर बारिश होती है, न सर्दी गर्मी का चक्र ठीक चलता है | सूखा, बाढ़, ओला आदि का कारण भी प्रदूषण है |

उपसंहार :- ( How to stop pollution in hindi )  प्रदूषण को बढ़ाने में कल कारखाने वैज्ञानिक साधनों का अधिक उपयोग, फ्रिज, कूलर, आदि दोषी है | वृक्षों को अंधाधुंध काटने से मौसम का चक्र गिरा है | घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली ना होने से भी प्रदूषण बड़ा है |प्रदूषण से बचने के लिए चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाए | सड़कों के किनारे घने वृक्ष हो | आबादी वाले क्षेत्र खुले हो हवादार हो हरियाली से बड़े हो | कल-कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए |और उन से निकले प्रदूषित को खत्म करके करने के तरीके सोचना चाहिए |

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