Essay on Air Pollution in Hindi

इस निबंध का शीर्षक है – Essay on Air Pollution in Hindi. इसमें हमने प्रदूषण की समस्या का कारण इसके दुष्प्रभाव और प्रदूषण को रोकने के लिए सभी आवश्यक कार्य जो हमें करना चाहिए उसके विषय में विस्तार से चर्चा किए हैं । सभी Class के School Student के लिए Nibandh उपयोगी है ।

भूमिका  :- वायु प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जो हाल के वर्षों में बहुत अधिक बढ़ गई है। इस विषय के बारे में बात करने में मेरी दिलचस्पी इसलिए है क्योंकि यह समस्या  बढ़ती ही  जा रही है  मुझे आप सभी को  इस प्रकार के प्रदूषण के कारण होने वाली बड़ी समस्या से अवगत कराने की आवश्यकता है ताकि इस प्रकार के प्रदूषण से होने वाली ये सभी समस्याएं थोड़ी कम हो जाएं और इस तरह से अपने और अपने परिवारों के लिए एक बेहतर दुनिया बन सके।

Essay on Air Pollution in Hindi

विषयविस्तार :-  वायु  प्रदूषण का तात्पर्यवायु में   पदार्थों की उपस्थिति से है, जो आमतोर पर सुध हवा में मौजूद नहीं होते या काम मात्रा में होते हैं |  इन प्रदार्थों को प्रदूषक के नाम से जाना जाता है |

Essay on air pollution in hindi
Essay on air pollution in hindi

Causes of Air Pollution in Hindi ( वायु प्रदूषण के कारण ) :-  वायुमंडलीय प्रदूषकों को तीन बड़े समूहों में विभाजित किया गया है; इनमें से एक प्राकृतिक स्रोत हैं,  जिनमे ज्वालामुखि ( जोकि विभिन्न प्रकार के वाष्प और राख का उत्पादन करते हैं ) जंगल की आग आदि शामिल है |

हालाँकि ज्यादातर प्रदूषकों का स्रोत कृत्रिम है | ये मुख्यतः  बड़े  शहरी कार्यशालाओ और उद्योगों की देन  है जो उन सभी प्रदूषकों को छोड़ते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इन प्रदूषकों में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, ओजोन और कार्बन डाइऑक्साइड शामिल है |  येये सभी गैसों सभी जीबों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। SMOG, जोकि महानगरों की सर्दिओं की एक आम घटना है , धुए और कोहरे के मिश्रण को कहा जाता है जो की न केबल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि इनके कारण बहुत से दुर्घटनाएं भी होतीं है |

प्रदूषकों के एक अन्य स्रोत भी है – आम जनसंख्या | सामान्य सागरिकों द्वारा किये गए बहुत से काम के जैसे की कचरा जलाना,  वाहनों, मोटरसाइकिलों, हवाई जहाजों और बसों से निकलने वाला धुआं शामिल है | इसके अलावा कुछ जैविक संदूषक भी भी है जैसे की  वायरस, बैक्टीरिया, पराग कण और फेकलिज़म |

Effect of Air Pollution in Hindi ( Vayu Pradushan / वायु प्रदूषण का दुष्प्रभाव ) :-  मेट्रोपॉलिटन इंडेक्स ऑफ एयर क्वालिटी किस सहर के हवा की गुणवत्ता दिखाने के लिए जिम्मेदार है और दुर्भाग्य यह है की इसकी भारत के कई शहरों में इसकी स्तिथि इतनी ख़राब है की उन्हें दुनिया के कुछ सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है |

इन प्रदूषकों को हम हर दिन अपने  श्वास में लेने  मज़बूर है , जो  बड़ी समस्याएं के कारक है |  सतह से ऊष्मा का। उदाहरण के लिए, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), आपके आस-पास हवा में मौजूद होता है, जो 0.05 प्रतिशत से कम की एक विशिष्ट सांद्रता में होता है और आमतौर पर इसे सांस लेने से कोई नुकसान नहीं होता है (आप इसे दिन भर सांस लेते हैं); लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड की अत्यधिक उच्च सांद्रता वाली हवा (जैसे, ५-१० प्रतिशत) विषाक्त है और कुछ ही मिनटों में आपको मार सकती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, त्वचा में जलन, त्वचा का कैंसर इत्यादि, ये कुछ ऐसी ही बीमारियाँ हैं जो वायु प्रदूषण के कारण हो सकते है ।

चूंकि पृथ्वी का वातावरण बहुत अशांत है, वायु प्रदूषण अक्सर अपेक्षाकृत जल्दी से फैल जाता है  वायु प्रदुषण का सबसे खतरनाक प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव है जो धीरे धीरे दुनिया को गर्म बना हैरहा है । विश्व के कई इलाकों में  बाढ़ और  तापमान में बहुत अधिक अस्थिरता आम बात हो गयी है  और यह स्तिथि और  बदतर होगी |  यह उम्मीद की जाती है कि वर्ष 2030 तक तापमान 2-5 डिग्री celsius तक   जाएगा, और इसके लिए वृद्धि हुई परिणाम होंगे जैसे कि; समुद्र का स्तर एक और दो मीटर के बीच बढ़ जाएगा और इससे बाढ़ आएगी, मौसम चक्र बिगड़ेगा और अधिक आर्द्र जलवायु से रेगिस्तान और चरागाहों में वृद्धि होगी।

Method to control Air pollution in Hindi ( Vayu Pradushan  को नियंत्रित करने की विधि ) :-

इस गंभीर समस्या को निपटने के लिए सभी को एकजुट प्रयास करना होगा |  सार्वजनिक यातायात ( public transport ) का उपयोग अधिक से अधिक करना चाहिए | निजी वाहनों का उपयोग व्यवस्थित रूप से करना चाहिए |  सभी वाहनों का नियमित रूप से प्रदूषण परीक्षण ( pollution test ) करना चाहिए और ऐसे वाहन जो बहुत अधिक मात्रा में प्रदूषण फैलाती हो उनका उपयोग नहीं करना चाहिए |   लकड़ी या कोयले के दहन को प्रतिबंधित करें, एरोसोल के उपयोग से बचें और अधिक से अधिक पेड़ लगाने का प्रयत्न करे |

उपसंहार : – बड़े उद्योगों के लिए और कड़े कानूनों के आबश्यकता है | यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए के वो सबसे कुशल तकनीकों का  प्रयोग करके काम से काम प्रदूषण फैलाएं | हालाँकि  यह आबादी के अधिकांश भाग में निर्भर करता है कि हम इस समस्या को कैसे निपटाएंगे |  हमें अपना दृष्टिकोण बदलना शुरू करना चाहिए और इस तरह इस ज्ञान को घर के सबसे युवा तक पहुंचाना चाहिए ताकि वे और  जागरूक हों |

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *